🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 08:36:41 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

दृपति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

दृपति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

दृपति

अर्थ: पीड़ा करना, दुःख देना

संस्कृत: उत्क्लेशे

अंग्रेज़ी: to give pain, to injure, to torment

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. दृप् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. दृपत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ
  3. दृपत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ
  4. दृपती (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — दृप् (तुदादिगण) · अर्थ: पीड़ा करना, दुःख देना (उत्क्लेशे)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदृपतिदृपतःदृपन्ति
मध्यमदृपसिदृपथःदृपथ
उत्तमदृपामिदृपावःदृपामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दृपति · लिट्: ददर्प · लुट्: दर्पिता · लृट्: दर्पिष्यति · लोट्: दृपतात् · लङ्: अदृपत् · विधिलिङ्: दृपेत् · आशीर्लिङ्: दृप्यात् · लुङ्: अदर्पीत् · लृङ्: अदर्पिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दर्पण · ण्वुल्: दर्पकः · तृच्: दर्पिता · तव्य: दर्पितव्यः · अनीयर्: दर्पणीयः · क्त: दृपितः · क्तवतु: दृपितवान् · शतृ: दृपन् · स्य-शतृ: दर्पिष्यन् · क्त्वा: दर्पित्वा · ल्यप्: प्रदृप्य · तुमुन्: दर्पितुम् · णमुल्: दर्पम् · घञ्: दर्पः · क्तिन्: दृप्ति · क्वसु: ददृप्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
दृपतिदृप् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: दृपत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ | दृपत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

दृपति ➤ पीड़ा करना, दुःख देना
संस्कृत: उत्क्लेशे

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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