॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रसन्न होना, गर्व करना
संस्कृत: हर्षमोहनयोः
अंग्रेज़ी: to be glad,to be proud
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दृप्यति | दृप्यतः | दृप्यन्ति |
| मध्यम | दृप्यसि | दृप्यथः | दृप्यथ |
| उत्तम | दृप्यामि | दृप्यावः | दृप्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दृप्यति · लिट्: ददर्प · लुट्: दर्पिता · लृट्: दर्पिष्यति · लोट्: दृप्यतात् · लङ्: अदृप्यत् · विधिलिङ्: दृप्येत् · आशीर्लिङ्: दृप्यात् · लुङ्: अदर्पीत् · लृङ्: अदर्पिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दर्पण · ण्वुल्: दर्पकः · तृच्: दर्पिता · तव्य: दर्पितव्यः · अनीयर्: दर्पणीयः · क्त: दृप्तः · क्तवतु: दृप्तवान् · शतृ: दृप्यन् · स्य-शतृ: दर्पिष्यन् · क्त्वा: दर्पित्वा · ल्यप्: प्रदृप्य · तुमुन्: दर्पितुम् · णमुल्: दर्पम् · घञ्: दर्पः · क्तिन्: दृप्ति · क्वसु: ददृप्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| दृप्यति | दृप् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: दृप्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + शतृ | दृप्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृप् + क्यप् · तद्धित: दृप्य + तल् (भाववाचक) |
दृप्यति ➤ प्रसन्न होना, गर्व करना
संस्कृत: हर्षमोहनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड