॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दुःख देना, शोक करना
संस्कृत: परिकूजने
अंग्रेज़ी: to irritate, to cause pain, to mourn to grieve
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लङ् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अदेवत् / अदेवद् | अदेवताम् | अदेवन् |
| मध्यम | अदेवः | अदेवतम् | अदेवत |
| उत्तम | अदेवम् | अदेवाव | अदेवाम |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: देवति · लट् (आत्मने.): देवयते · लिट्: दिदेव · लिट् (आत्मने.): देवयाञ्चक्रे · लुट्: देविता · लुट् (आत्मने.): देवयिता · लृट्: देविष्यति · लृट् (आत्मने.): देवयिष्यते · लोट्: देवतात् · लोट् (आत्मने.): देवयताम् · लङ्: अदेवत् · लङ् (आत्मने.): अदेवयत · विधिलिङ्: देवेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): देवयेत · आशीर्लिङ्: दीव्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): देवयिषीष्ट · लुङ्: अदेवीत् · लुङ् (आत्मने.): अदीदिवत · लृङ्: अदेविष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अदेवयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: देवन · ण्वुल्: देवकः · तृच्: देविता · यत्: देव्यः · ण्यत्: देव्यः · तव्य: देवितव्यः · अनीयर्: देवनीयः · क्त: द्यूनः · क्तवतु: द्यूनवान् · शतृ: देवन् · स्य-शतृ: देविष्यन् · शानच्: देवयमानः · क्त्वा: द्यूत्वा · ल्यप्: प्रदीव्य · तुमुन्: देवितुम् · णमुल्: देवम् · घञ्: देवः · क्तिन्: द्यूति · क्वसु: दिदिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| देवः | दिव् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे) अन्य सम्भावना: देवृ (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन | देव (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
देवः ➤ दुःख देना, शोक करना
संस्कृत: परिकूजने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड