🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 05:25:56 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

देवः

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

देवः

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

देवः

अर्थ: दुःख देना, शोक करना

संस्कृत: परिकूजने

अंग्रेज़ी: to irritate, to cause pain, to mourn to grieve

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. दिव् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे)
  2. देवृ (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन
  3. देव (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — दिव् (चुरादिगण) · अर्थ: दुःख देना, शोक करना (परिकूजने)

लङ् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअदेवत् / अदेवद्अदेवताम्अदेवन्
मध्यमअदेवःअदेवतम्अदेवत
उत्तमअदेवम्अदेवावअदेवाम

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: देवति · लट् (आत्मने.): देवयते · लिट्: दिदेव · लिट् (आत्मने.): देवयाञ्चक्रे · लुट्: देविता · लुट् (आत्मने.): देवयिता · लृट्: देविष्यति · लृट् (आत्मने.): देवयिष्यते · लोट्: देवतात् · लोट् (आत्मने.): देवयताम् · लङ्: अदेवत् · लङ् (आत्मने.): अदेवयत · विधिलिङ्: देवेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): देवयेत · आशीर्लिङ्: दीव्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): देवयिषीष्ट · लुङ्: अदेवीत् · लुङ् (आत्मने.): अदीदिवत · लृङ्: अदेविष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अदेवयिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: देवन · ण्वुल्: देवकः · तृच्: देविता · यत्: देव्यः · ण्यत्: देव्यः · तव्य: देवितव्यः · अनीयर्: देवनीयः · क्त: द्यूनः · क्तवतु: द्यूनवान् · शतृ: देवन् · स्य-शतृ: देविष्यन् · शानच्: देवयमानः · क्त्वा: द्यूत्वा · ल्यप्: प्रदीव्य · तुमुन्: देवितुम् · णमुल्: देवम् · घञ्: देवः · क्तिन्: द्यूति · क्वसु: दिदिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
देवःदिव् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे)
अन्य सम्भावना: देवृ (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन | देव (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

देवः ➤ दुःख देना, शोक करना
संस्कृत: परिकूजने

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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