॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: आदर करना, सत्कार करना
संस्कृत: आदरे
अंग्रेज़ी: to respect, to praise, to honor
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | द्रियते | द्रियेते | द्रियन्ते |
| मध्यम | द्रियसे | द्रियेथे | द्रियध्वे |
| उत्तम | द्रिये | द्रियावहे | द्रियामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): द्रियते · लिट् (आत्मने.): दद्रे · लुट् (आत्मने.): दर्ता · लृट् (आत्मने.): दरिष्यते · लोट् (आत्मने.): द्रियताम् · लङ् (आत्मने.): अद्रियत · विधिलिङ् (आत्मने.): द्रियेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): दृषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अदृत · लृङ् (आत्मने.): अदरिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दरण · ण्वुल्: दारकः · तृच्: दर्ता · ण्यत्: दार्यः · तव्य: दर्तव्यः · अनीयर्: दरणीयः · क्त: दृतः · क्तवतु: दृतवान् · शानच्: द्रियमाणः · क्त्वा: दृत्वा · ल्यप्: प्रदृत्य · तुमुन्: दर्तुम् · णमुल्: दारम् · घञ्: दारः · क्तिन्: दृति · क्वसु: ददृवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| द्रियते | दृ धातु (तुदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: दृ धातु (स्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे | दृ धातु (तुदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे |
द्रियते ➤ आदर करना, सत्कार करना
संस्कृत: आदरे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड