🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 07:34:22 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

धृणाति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

धृणाति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

धृणाति

अर्थ: हिन्दी अर्थ उपलब्ध नहीं

संस्कृत: वयोहानौ

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. धॄ धातु (क्र्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — धॄ (क्र्यादिगण) · अर्थ: (वयोहानौ)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमधृणातिधृणीतःधृणन्ति
मध्यमधृणासिधृणीथःधृणीथ
उत्तमधृणामिधृणीवःधृणीमः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: धृणाति · लिट्: दधार · लुट्: धरिता · लृट्: धरिष्यति · लोट्: धृणातु · लङ्: अधृणात् · विधिलिङ्: धृणीयात् · आशीर्लिङ्: धीर्यात् · लुङ्: अधारीत् · लृङ्: अधरिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: धरण · ण्वुल्: धारकः · तृच्: धरीता · ण्यत्: धार्यः · तव्य: धरीतव्यः · अनीयर्: धरणीयः · क्त: धीर्णः · क्तवतु: धीर्णवान् · शतृ: धृणन् · स्य-शतृ: धरीष्यन् · क्त्वा: धीर्त्वा · ल्यप्: प्रधीर्य · तुमुन्: धरीतुम् · णमुल्: धारम् · क्तिन्: धीर्णि · क्वसु: दिधीर्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
धृणातिधॄ धातु (क्र्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

धृणाति ➤ अर्थ उपलब्ध नहीं
संस्कृत: वयोहानौ

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें