॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: फैलाना, पसारना, प्रपंच करना
संस्कृत: विस्तारवचने
अंग्रेज़ी: to spread, to expand
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पञ्चति / पञ्चयति | पञ्चतः / पञ्चयतः | पञ्चन्ति / पञ्चयन्ति |
| मध्यम | पञ्चयसि / पञ्चसि | पञ्चथः / पञ्चयथः | पञ्चथ / पञ्चयथ |
| उत्तम | पञ्चयामि / पञ्चामि | पञ्चयावः / पञ्चावः | पञ्चयामः / पञ्चामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: पञ्चति · लट् (आत्मने.): पञ्चयते · लिट्: पञ्चयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): पञ्चयाञ्चक्रे · लुट्: पञ्चयिता · लुट् (आत्मने.): पञ्चयिता · लृट्: पञ्चयिष्यति · लृट् (आत्मने.): पञ्चयिष्यते · लोट्: पञ्चतात् · लोट् (आत्मने.): पञ्चयताम् · लङ्: अपञ्चत् · लङ् (आत्मने.): अपञ्चयत · विधिलिङ्: पञ्चयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): पञ्चयेत · आशीर्लिङ्: पञ्च्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पञ्चयिषीष्ट · लुङ्: अपञ्चीत् · लुङ् (आत्मने.): अपपञ्चत · लृङ्: अपञ्चयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अपञ्चयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पञ्चन · ण्वुल्: पञ्चकः · तृच्: पञ्चिता · यत्: पञ्च्यः · ण्यत्: पञ्च्यः · तव्य: पञ्चितव्यः · अनीयर्: पञ्चनीयः · क्त: पञ्चितः · क्तवतु: पञ्चितवान् · शतृ: पञ्चन् · स्य-शतृ: पञ्चिष्यन् · शानच्: पञ्चयमानः · क्त्वा: पञ्चित्वा · ल्यप्: प्रपञ्च्य · तुमुन्: पञ्चितुम् · णमुल्: पञ्चम् · घञ्: पङ्कः · क्तिन्: पङ्क्ति · क्वसु: पपञ्च्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पञ्चति | पञ्च् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पञ्चत् (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन | पञ्चत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पञ्च् + शतृ |
पञ्चति ➤ फैलाना, पसारना, प्रपंच करना
संस्कृत: विस्तारवचने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड