🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 11:19:33 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

परति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

परति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

परति

अर्थ: भरना, पूर्ण करना

संस्कृत: पूरणे

अंग्रेज़ी: to fill, to complete

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. पॄ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. परत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पॄ + शतृ
  3. परत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पॄ + शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — पॄ (चुरादिगण) · अर्थ: भरना, पूर्ण करना (पूरणे)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपरति / पारयतिपरतः / पारयतःपरन्ति / पारयन्ति
मध्यमपरसि / पारयसिपरथः / पारयथःपरथ / पारयथ
उत्तमपरामि / पारयामिपरावः / पारयावःपरामः / पारयामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: परति · लट् (आत्मने.): पारयते · लिट्: पपार · लिट् (आत्मने.): पारयाञ्चक्रे · लुट्: परिता · लुट् (आत्मने.): पारयिता · लृट्: परिष्यति · लृट् (आत्मने.): पारयिष्यते · लोट्: परतात् · लोट् (आत्मने.): पारयताम् · लङ्: अपरत् · लङ् (आत्मने.): अपारयत · विधिलिङ्: परेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): पारयेत · आशीर्लिङ्: पार्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पारयिषीष्ट · लुङ्: अपारीत् · लुङ् (आत्मने.): अपीपरत · लृङ्: अपरिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अपारयिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: परण · ण्वुल्: पारकः · तृच्: परीता · यत्: पार्यः · ण्यत्: पार्यः · तव्य: परीतव्यः · अनीयर्: परणीयः · क्त: पूर्तः · क्तवतु: पूर्तवान् · शतृ: परन् · स्य-शतृ: परीष्यन् · शानच्: पारयमाणः · क्त्वा: पूर्त्वा · ल्यप्: प्रपूर्य · तुमुन्: परीतुम् · णमुल्: पारम् · क्तिन्: पूर्ति · क्वसु: पुपूर्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
परतिपॄ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: परत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पॄ + शतृ | परत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पॄ + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

परति ➤ भरना, पूर्ण करना
संस्कृत: पूरणे

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें