॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: गीला होना, भीगना, चिकना होना
संस्कृत: स्नेहने
अंग्रेज़ी: to be wet, to be slippery
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पर्षते | पर्षेते | पर्षन्ते |
| मध्यम | पर्षसे | पर्षेथे | पर्षध्वे |
| उत्तम | पर्षे | पर्षावहे | पर्षामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): पर्षते · लिट् (आत्मने.): पपर्षे · लुट् (आत्मने.): पर्षिता · लृट् (आत्मने.): पर्षिष्यते · लोट् (आत्मने.): पर्षताम् · लङ् (आत्मने.): अपर्षत · विधिलिङ् (आत्मने.): पर्षेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पर्षिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अपर्षिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अपर्षिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पर्षण · ण्वुल्: पर्षकः · तृच्: पर्षिता · ण्यत्: पर्ष्यः · तव्य: पर्षितव्यः · अनीयर्: पर्षणीयः · क्त: पर्षितः · क्तवतु: पर्षितवान् · शानच्: पर्षमाणः · क्त्वा: पर्षित्वा · ल्यप्: प्रपर्ष्य · तुमुन्: पर्षितुम् · णमुल्: पर्षम् · घञ्: पर्षः · क्तिन्: पर्ष्टि · क्वसु: पपर्ष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पर्षते | पर्ष् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पर्षत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पृष् + शतृ | पर्षत् (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पृष् + शतृ |
पर्षते ➤ गीला होना, भीगना, चिकना होना
संस्कृत: स्नेहने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड