॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: रंगना, चमकीला करना, धुंधुरुओंका शब्द होना, टुकड़े टुकड़े करना, अस्पष्ट शब्द होना
संस्कृत: वर्णे सम्पर्चने अवयवे अव्यक्ते शब्दे च
अंग्रेज़ी: to color, to paint, to make shine, to murmur
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पिङ्क्ते | पिञ्जाते | पिञ्जते |
| मध्यम | पिङ्क्षे | पिञ्जाथे | पिङ्ग्ध्वे |
| उत्तम | पिञ्जे | पिञ्ज्वहे | पिञ्ज्महे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): पिङ्क्ते · लिट् (आत्मने.): पिपिञ्जे · लुट् (आत्मने.): पिञ्जिता · लृट् (आत्मने.): पिञ्जिष्यते · लोट् (आत्मने.): पिङ्क्ताम् · लङ् (आत्मने.): अपिङ्क्त · विधिलिङ् (आत्मने.): पिञ्जीत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पिञ्जिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अपिञ्जिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अपिञ्जिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पिञ्जन · ण्वुल्: पिञ्जकः · तृच्: पिञ्जिता · ण्यत्: पिञ्ज्यः · तव्य: पिञ्जितव्यः · अनीयर्: पिञ्जनीयः · क्त: पिञ्जितः · क्तवतु: पिञ्जितवान् · शानच्: पिञ्जानः · क्त्वा: पिञ्जित्वा · ल्यप्: प्रपिज्य · तुमुन्: पिञ्जितुम् · णमुल्: पिञ्जम् · घञ्: पिङ्गः · क्तिन्: पिङ्क्ति · क्वसु: पिपिञ्ज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पिङ्क्ते | पिञ्ज् धातु (अदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पिङ्क्ति (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: पिञ्ज् + क्तिन् |
पिङ्क्ते ➤ रंगना, चमकीला करना, धुंधुरुओंका शब्द होना, टुकड़े टुकड़े करना, अस्पष्ट शब्द होना
संस्कृत: वर्णे सम्पर्चने अवयवे अव्यक्ते शब्दे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड