॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: संसर्ग करना, आलिंगन करना, एक में एक अटकाना
संस्कृत: संसर्गे
अंग्रेज़ी: to come in contact, to embrace, to hug, to join, to lock in
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पुटयति | पुटयतः | पुटयन्ति |
| मध्यम | पुटयसि | पुटयथः | पुटयथ |
| उत्तम | पुटयामि | पुटयावः | पुटयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: पुटयति · लट् (आत्मने.): पुटयते · लिट्: पुटयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): पुटयाञ्चक्रे · लुट्: पुटयिता · लुट् (आत्मने.): पुटयिता · लृट्: पुटयिष्यति · लृट् (आत्मने.): पुटयिष्यते · लोट्: पुटयतात् · लोट् (आत्मने.): पुटयताम् · लङ्: अपुटयत् · लङ् (आत्मने.): अपुटयत · विधिलिङ्: पुटयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): पुटयेत · आशीर्लिङ्: पुट्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पुटयिषीष्ट · लुङ्: अपुपुटत् · लुङ् (आत्मने.): अपुपुटत · लृङ्: अपुटयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अपुटयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पुटन · ण्वुल्: पुटकः · तृच्: पुटयिता · यत्: पुट्यः · तव्य: पुटयितव्यः · अनीयर्: पुटनीयः · क्त: पुटितः · क्तवतु: पुटितवान् · शतृ: पुटयन् · स्य-शतृ: पुटयिष्यन् · शानच्: पुटयमानः · क्त्वा: पुटयित्वा · ल्यप्: प्रपुटय्य · तुमुन्: पुटयितुम् · णमुल्: पुटम् · क्तिन्: पुट्टि · क्वसु: पुटयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पुटयति | पुट धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पुट धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | पुटयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पुट + शतृ |
पुटयति ➤ संसर्ग करना, आलिंगन करना, एक में एक अटकाना
संस्कृत: संसर्गे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड