॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: तोडना, चीरना, दुर्गन्ध आना, बदबू आना
संस्कृत: विशरणे दुर्गन्धे च
अंग्रेज़ी: to split,to stink, to cut
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पूयते | पूयेते | पूयन्ते |
| मध्यम | पूयसे | पूयेथे | पूयध्वे |
| उत्तम | पूये | पूयावहे | पूयामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): पूयते · लिट् (आत्मने.): पुपूये · लुट् (आत्मने.): पूयिता · लृट् (आत्मने.): पूयिष्यते · लोट् (आत्मने.): पूयताम् · लङ् (आत्मने.): अपूयत · विधिलिङ् (आत्मने.): पूयेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पूयिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अपूयिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अपूयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पूयन · ण्वुल्: पूयकः · तृच्: पूयिता · ण्यत्: पूय्यः · तव्य: पूयितव्यः · अनीयर्: पूयनीयः · क्त: पूतः · क्तवतु: पूतवान् · शानच्: पूयमानः · क्त्वा: पूयित्वा · ल्यप्: प्रपूय्य · तुमुन्: पूयितुम् · णमुल्: पूयम् · घञ्: पूयः · क्तिन्: पूति · क्वसु: पुपूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पूयते | पूय् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पू धातु (क्र्यादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे | पू धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे |
पूयते ➤ तोडना, चीरना, दुर्गन्ध आना, बदबू आना
संस्कृत: विशरणे दुर्गन्धे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड