🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:22:48 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

पृणक्ति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

पृणक्ति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

पृणक्ति

अर्थ: सम्पर्क करना, स्पर्श करना, संयोग करना

संस्कृत: सम्पर्के

अंग्रेज़ी: to contact, to touch, to join, to unite

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. पृच् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — पृच् (रुधादिगण) · अर्थ: सम्पर्क करना, स्पर्श करना, संयोग करना (सम्पर्के)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपृणक्तिपृङ्क्तःपृञ्चन्ति
मध्यमपृणक्षिपृङ्क्थःपृङ्क्थ
उत्तमपृणच्मिपृञ्च्वःपृञ्च्मः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: पृणक्ति · लिट्: पपर्च · लुट्: पर्चिता · लृट्: पर्चिष्यति · लोट्: पृङ्क्तात् · लङ्: अपृणक् · विधिलिङ्: पृञ्च्यात् · आशीर्लिङ्: पृच्यात् · लुङ्: अपर्चीत् · लृङ्: अपर्चिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पर्चन · ण्वुल्: पर्चकः · तृच्: पर्चिता · तव्य: पर्चितव्यः · अनीयर्: पर्चनीयः · क्त: पृक्तः · क्तवतु: पृक्तवान् · शतृ: पृञ्चन् · स्य-शतृ: पर्चिष्यन् · क्त्वा: पर्चित्वा · ल्यप्: प्रपृच्य · तुमुन्: पर्चितुम् · णमुल्: पर्चम् · घञ्: पर्कः · क्तिन्: पृक्ति · क्वसु: पपृच्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
पृणक्तिपृच् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

पृणक्ति ➤ सम्पर्क करना, स्पर्श करना, संयोग करना
संस्कृत: सम्पर्के

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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