॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रीती करना, तृप्त करना, कामना करना, कांतिमान होना
संस्कृत: तर्पणे कान्तौ च
अंग्रेज़ी: to love, to satisfy, to desire, to wish, to be radiant
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | प्रयति / प्राययति / प्रीणयति | प्रयतः / प्राययतः / प्रीणयतः | प्रयन्ति / प्राययन्ति / प्रीणयन्ति |
| मध्यम | प्रयसि / प्राययसि / प्रीणयसि | प्रयथः / प्राययथः / प्रीणयथः | प्रयथ / प्राययथ / प्रीणयथ |
| उत्तम | प्रयामि / प्राययामि / प्रीणयामि | प्रयावः / प्राययावः / प्रीणयावः | प्रयामः / प्राययामः / प्रीणयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: प्रयति · लट् (आत्मने.): प्रयते · लिट्: पिप्राय · लिट् (आत्मने.): पिप्रिये · लुट्: प्रयिता · लुट् (आत्मने.): प्रयिता · लृट्: प्रयिष्यति · लृट् (आत्मने.): प्रयिष्यते · लोट्: प्रयतात् · लोट् (आत्मने.): प्रयताम् · लङ्: अप्रयत् · लङ् (आत्मने.): अप्रयत · विधिलिङ्: प्रयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): प्रयेत · आशीर्लिङ्: प्राय्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): प्रयिषीष्ट · लुङ्: अपिप्रयत् · लुङ् (आत्मने.): अपिप्रयत · लृङ्: अप्रयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अप्रयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: प्रयण · ण्वुल्: प्रायकः · तृच्: प्रयिता · यत्: प्रेयः · तव्य: प्रयितव्यः · अनीयर्: प्रयणीयः · क्त: प्रियितः · क्तवतु: प्रियितवान् · शतृ: प्रयन् · स्य-शतृ: प्रयिष्यन् · शानच्: प्रयमाणः · क्त्वा: प्रयित्वा · ल्यप्: प्रप्रीय · तुमुन्: प्रयितुम् · णमुल्: प्रायम् · क्तिन्: प्रीति · क्वसु: पिप्रीवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| प्रयति | प्री धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: प्रयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: प्री + शतृ | प्रयत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: प्री + शतृ |
प्रयति ➤ प्रीती करना, तृप्त करना, कामना करना, कांतिमान होना
संस्कृत: तर्पणे कान्तौ च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड