॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्नान करना, नहाना, अंग धोना
संस्कृत: आप्लाव्ये
अंग्रेज़ी: to bathe
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | बाडते | बाडेते | बाडन्ते |
| मध्यम | बाडसे | बाडेथे | बाडध्वे |
| उत्तम | बाडे | बाडावहे | बाडामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): बाडते · लिट् (आत्मने.): बबाडे · लुट् (आत्मने.): बाडिता · लृट् (आत्मने.): बाडिष्यते · लोट् (आत्मने.): बाडताम् · लङ् (आत्मने.): अबाडत · विधिलिङ् (आत्मने.): बाडेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): बाडिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अबाडिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अबाडिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: बाडन · ण्वुल्: बाडकः · तृच्: बाडिता · ण्यत्: बाड्यः · तव्य: बाडितव्यः · अनीयर्: बाडनीयः · क्त: बाडितः · क्तवतु: बाडितवान् · शानच्: बाडमानः · क्त्वा: बाडित्वा · ल्यप्: प्रबाड्य · तुमुन्: बाडितुम् · णमुल्: बाडम् · घञ्: बाडः · क्तिन्: बाट्टि · क्वसु: बबाड्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| बाडते | बाड् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: बाडता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: बाड् + घञ् · तद्धित: बाड + तल् (भाववाचक) | बाडता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: बाड् + घञ् · तद्धित: बाड + तल् (भाववाचक) |
बाडते ➤ स्नान करना, नहाना, अंग धोना
संस्कृत: आप्लाव्ये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड