॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: धारण करना, पोषण करना
संस्कृत: धारणपोषणयोः
अंग्रेज़ी: to wear, to bear,to support,to nourish,to protect
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | बिभर्ति | बिभृतः | बिभ्रति |
| मध्यम | बिभर्षि | बिभृथः | बिभृथ |
| उत्तम | बिभर्मि | बिभृवः | बिभृमः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: बिभर्ति · लट् (आत्मने.): बिभृते · लिट्: बभार · लिट् (आत्मने.): बभ्रे · लुट्: भर्ता · लुट् (आत्मने.): भर्ता · लृट्: भरिष्यति · लृट् (आत्मने.): भरिष्यते · लोट्: बिभर्तु · लोट् (आत्मने.): बिभृताम् · लङ्: अबिभः · लङ् (आत्मने.): अबिभृत · विधिलिङ्: बिभृयात् · विधिलिङ् (आत्मने.): बिभ्रीत · आशीर्लिङ्: भ्रियात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भृषीष्ट · लुङ्: अभार्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अभृत · लृङ्: अभरिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अभरिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भरण · ण्वुल्: भारकः · तृच्: भर्ता · ण्यत्: भार्यः · तव्य: भर्तव्यः · अनीयर्: भरणीयः · क्त: भृतः · क्तवतु: भृतवान् · शतृ: बिभ्रत्/बिभ्रद् · स्य-शतृ: भरिष्यन् · शानच्: बिभ्राणः · क्त्वा: भृत्वा · ल्यप्: प्रभृत्य · तुमुन्: भर्तुम् · णमुल्: भारम् · घञ्: भारः · क्तिन्: भृति · क्वसु: बिभराम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| बिभर्ति | भृ धातु (जुहोत्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
बिभर्ति ➤ धारण करना, पोषण करना
संस्कृत: धारणपोषणयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड