॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: यशस्वी, प्रसिद्ध
संस्कृत: बुद्धः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत
व्युत्पत्ति: भग+ मतुप् (तद्धितान्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भगवान् | भगवन्तौ | भगवन्तः |
| द्वितीया | भगवन्तम् | भगवन्तौ | भगवतः |
| तृतीया | भगवता | भगवद्भ्याम् | भगवद्भिः |
| चतुर्थी | भगवते | भगवद्भ्याम् | भगवद्भ्यः |
| पञ्चमी | भगवतः | भगवद्भ्याम् | भगवद्भ्यः |
| षष्ठी | भगवतः | भगवतोः | भगवताम् |
| सप्तमी | भगवति | भगवतोः | भगवत्सु |
| सम्बोधन | हे भगवन् | हे भगवन्तौ | हे भगवन्तः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भगवान् | भगवत् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
भगवान् ➤ यशस्वी, प्रसिद्ध
संस्कृत: बुद्धः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड