🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:26:44 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

भनक्ति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

भनक्ति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

भनक्ति

अर्थ: नष्ट करना

संस्कृत: आमर्दने

अंग्रेज़ी: to destroy

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. भञ्ज् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — भञ्ज् (रुधादिगण) · अर्थ: नष्ट करना (आमर्दने)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभनक्तिभङ्क्तःभञ्जन्ति
मध्यमभनक्षिभङ्क्थःभङ्क्थ
उत्तमभनज्मिभञ्ज्वःभञ्ज्मः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भनक्ति · लिट्: बभञ्ज · लुट्: भङ्क्ता · लृट्: भङ्क्ष्यति · लोट्: भङ्क्तात् · लङ्: अभनक् · विधिलिङ्: भञ्ज्यात् · आशीर्लिङ्: भज्यात् · लुङ्: अभाङ्क्षीत् · लृङ्: अभङ्क्ष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भञ्जन · ण्वुल्: भञ्जकः · तृच्: भङ्क्ता · ण्यत्: भञ्ज्यः · तव्य: भङ्क्तव्यः · अनीयर्: भञ्जनीयः · क्त: भग्नः · क्तवतु: भग्नवान् · शतृ: भञ्जन् · स्य-शतृ: भङ्क्ष्यन् · क्त्वा: भक्त्वा · ल्यप्: प्रभज्य · तुमुन्: भङ्क्तुम् · णमुल्: भञ्जम् · घञ्: भङ्गः · क्तिन्: भक्ति · क्वसु: भेजिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
भनक्तिभञ्ज् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

भनक्ति ➤ नष्ट करना
संस्कृत: आमर्दने

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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