॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पकाना, भुजना
संस्कृत: पाके
अंग्रेज़ी: to fry,to roast,to parch
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भृज्जति | भृज्जतः | भृज्जन्ति |
| मध्यम | भृज्जसि | भृज्जथः | भृज्जथ |
| उत्तम | भृज्जामि | भृज्जावः | भृज्जामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भृज्जति · लट् (आत्मने.): भृज्जते · लिट्: बभर्ज · लिट् (आत्मने.): बभर्जे · लुट्: भर्ष्टा · लुट् (आत्मने.): भर्ष्टा · लृट्: भर्क्ष्यति · लृट् (आत्मने.): भर्क्ष्यते · लोट्: भृज्जतात् · लोट् (आत्मने.): भृज्जताम् · लङ्: अभृज्जत् · लङ् (आत्मने.): अभृज्जत · विधिलिङ्: भृज्जेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): भृज्जेत · आशीर्लिङ्: भृज्ज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भर्क्षीष्ट · लुङ्: अभार्क्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अभर्ष्ट · लृङ्: अभर्क्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अभर्क्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भर्जन · ण्वुल्: भर्जकः · तृच्: भर्ष्टा · ण्यत्: भर्ज्यः · तव्य: भर्ष्टव्यः · अनीयर्: भर्जनीयः · क्त: भृष्टः · क्तवतु: भृष्टवान् · शतृ: भृज्जन् · स्य-शतृ: भर्क्ष्यन् · शानच्: भृज्जमानः · क्त्वा: भृष्ट्वा · ल्यप्: प्रभृज्ज्य · तुमुन्: भर्ष्टुम् · णमुल्: भर्जम् · घञ्: भर्गः · क्तिन्: भृष्टि · क्वसु: बभृज्ज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भृज्जति | भ्रज्ज् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भृज्जत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भ्रज्ज् + शतृ | भृज्जत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भ्रज्ज् + शतृ |
भृज्जति ➤ पकाना, भुजना
संस्कृत: पाके
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड