॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: अस्थिर होना, भ्रमण करना
संस्कृत: अनवस्थाने
अंग्रेज़ी: to be unsteady,to wander to roam
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भ्रमति / भ्राम्यति | भ्रमतः / भ्राम्यतः | भ्रमन्ति / भ्राम्यन्ति |
| मध्यम | भ्रमसि / भ्राम्यसि | भ्रमथः / भ्राम्यथः | भ्रमथ / भ्राम्यथ |
| उत्तम | भ्रमामि / भ्राम्यामि | भ्रमावः / भ्राम्यावः | भ्रमामः / भ्राम्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भ्रमति · लिट्: बभ्राम · लुट्: भ्रमिता · लृट्: भ्रमिष्यति · लोट्: भ्रमतात् · लङ्: अभ्रमत् · विधिलिङ्: भ्रमेत् · आशीर्लिङ्: भ्रम्यात् · लुङ्: अभ्रमत् · लृङ्: अभ्रमिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भ्रमण · ण्वुल्: भ्रमकः · तृच्: भ्रमिता · यत्: भ्रम्यः · तव्य: भ्रमितव्यः · अनीयर्: भ्रमणीयः · क्त: भ्रान्तः · क्तवतु: भ्रान्तवान् · शतृ: भ्राम्यन् · स्य-शतृ: भ्रमिष्यन् · क्त्वा: भ्रान्त्वा · ल्यप्: प्रभ्रम्य · तुमुन्: भ्रमितुम् · णमुल्: भ्रमम् · घञ्: भ्रमः · क्तिन्: भ्रान्ति · क्वसु: भ्रेमिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भ्रमति | भ्रम् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भ्रम् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | भ्रमत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भ्रम् + शतृ |
भ्रमति ➤ अस्थिर होना, भ्रमण करना
संस्कृत: अनवस्थाने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड