॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जाना
संस्कृत: गतौ
अंग्रेज़ी: to go
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भ्लेषति | भ्लेषतः | भ्लेषन्ति |
| मध्यम | भ्लेषसि | भ्लेषथः | भ्लेषथ |
| उत्तम | भ्लेषामि | भ्लेषावः | भ्लेषामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भ्लेषति · लट् (आत्मने.): भ्लेषते · लिट्: बिभ्लेष · लिट् (आत्मने.): बिभ्लेषे · लुट्: भ्लेषिता · लुट् (आत्मने.): भ्लेषिता · लृट्: भ्लेषिष्यति · लृट् (आत्मने.): भ्लेषिष्यते · लोट्: भ्लेषतात् · लोट् (आत्मने.): भ्लेषताम् · लङ्: अभ्लेषत् · लङ् (आत्मने.): अभ्लेषत · विधिलिङ्: भ्लेषेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): भ्लेषेत · आशीर्लिङ्: भ्लेष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भ्लेषिषीष्ट · लुङ्: अभ्लेषीत् · लुङ् (आत्मने.): अभ्लेषिष्ट · लृङ्: अभ्लेषिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अभ्लेषिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भ्लेषण · ण्वुल्: भ्लेषकः · तृच्: भ्लेषिता · ण्यत्: भ्लेष्यः · तव्य: भ्लेषितव्यः · अनीयर्: भ्लेषणीयः · क्त: भ्लेषितः · क्तवतु: भ्लेषितवान् · शतृ: भ्लेषन् · स्य-शतृ: भ्लेषिष्यन् · शानच्: भ्लेषमाणः · क्त्वा: भ्लेषित्वा · ल्यप्: प्रभ्लेष्य · तुमुन्: भ्लेषितुम् · णमुल्: भ्लेषम् · घञ्: भ्लेषः · क्तिन्: भ्लेष्टि · क्वसु: बिभ्लेष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भ्लेषति | भ्लेष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भ्लेषत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भ्लेष् + शतृ | भ्लेषत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भ्लेष् + शतृ |
भ्लेषति ➤ जाना
संस्कृत: गतौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड