॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बुद्धि, समझदारी, भाव, ज्ञान, संकल्प
संस्कृत: बुद्धिः · पर्याय: बुद्धि, मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा
व्युत्पत्ति: मन् + क्तिन् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मतिः | मती | मतयः |
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीः |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी | मतये / मत्यै | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| पञ्चमी | मतेः / मत्याः | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| षष्ठी | मतेः / मत्याः | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी | मतौ / मत्याम् | मत्योः | मतिषु |
| सम्बोधन | हे मते | हे मती | हे मतयः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मतिः | मति (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
मतिः ➤ बुद्धि, समझदारी, भाव, ज्ञान, संकल्प
संस्कृत: बुद्धिः · पर्याय: बुद्धि, मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| मति |
बुद्धि के नाम (१.५.१) — बुद्धि, मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा, शेमुषी, प्रेक्षा, उपलब्धि |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड