॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: वायु
संस्कृत: वायुः, वायव्यदिशायाः स्वामी, वायुदेवः · पर्याय: श्वसन, स्पर्शन, वायु, मातरिश्वन्, सदागति
अंग्रेज़ी: Air
व्युत्पत्ति: मृ + उति
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मरुत् / मरुद् | मरुतौ | मरुतः |
| द्वितीया | मरुतम् | मरुतौ | मरुतः |
| तृतीया | मरुता | मरुद्भ्याम् | मरुद्भिः |
| चतुर्थी | मरुते | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| पञ्चमी | मरुतः | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| षष्ठी | मरुतः | मरुतोः | मरुताम् |
| सप्तमी | मरुति | मरुतोः | मरुत्सु |
| सम्बोधन | हे मरुत् / हे मरुद् | हे मरुतौ | हे मरुतः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मरुत् | मरुत् (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन अन्य सम्भावना: मरुत् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
मरुत् ➤ वायु
संस्कृत: वायुः, वायव्यदिशायाः स्वामी, वायुदेवः · पर्याय: श्वसन, स्पर्शन, वायु, मातरिश्वन्, सदागति
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| मरुत् |
वायु के और नाम (१.१.७५) — समीर, मारुत, जगत्प्राण, समीरण, नभस्वान्, वात, पवन, पवमान |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड