🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:26:47 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

मर्बति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

मर्बति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

मर्बति

अर्थ: जाना

संस्कृत: गतौ

अंग्रेज़ी: to go

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. मर्ब् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. मर्बत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मर्ब् + शतृ
  3. मर्बत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मर्ब् + शतृ
  4. मर्बता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मर्ब् + घञ् · तद्धित: मर्ब + तल् (भाववाचक)

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — मर्ब् (भ्वादिगण) · अर्थ: जाना (गतौ)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथममर्बतिमर्बतःमर्बन्ति
मध्यममर्बसिमर्बथःमर्बथ
उत्तममर्बामिमर्बावःमर्बामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: मर्बति · लिट्: ममर्ब · लुट्: मर्बिता · लृट्: मर्बिष्यति · लोट्: मर्बतात् · लङ्: अमर्बत् · विधिलिङ्: मर्बेत् · आशीर्लिङ्: मर्ब्यात् · लुङ्: अमर्बीत् · लृङ्: अमर्बिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मर्बण · ण्वुल्: मर्बकः · तृच्: मर्बिता · ण्यत्: मर्ब्यः · तव्य: मर्बितव्यः · अनीयर्: मर्बणीयः · क्त: मर्बितः · क्तवतु: मर्बितवान् · शतृ: मर्बन् · स्य-शतृ: मर्बिष्यन् · क्त्वा: मर्बित्वा · ल्यप्: प्रमर्ब्य · तुमुन्: मर्बितुम् · णमुल्: मर्बम् · घञ्: मर्बः · क्तिन्: मर्प्ति · क्वसु: ममर्ब्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
मर्बतिमर्ब् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: मर्बत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मर्ब् + शतृ | मर्बत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मर्ब् + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

मर्बति ➤ जाना
संस्कृत: गतौ

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें