॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: गर्व करना, स्थिर करना, गर्वीला होना
संस्कृत: स्तम्भे
अंग्रेज़ी: to boast, to be egoistic, to be proud, to stabilize
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मानयते | मानयेते | मानयन्ते |
| मध्यम | मानयसे | मानयेथे | मानयध्वे |
| उत्तम | मानये | मानयावहे | मानयामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): मानयते · लिट् (आत्मने.): मानयाञ्चक्रे · लुट् (आत्मने.): मानयिता · लृट् (आत्मने.): मानयिष्यते · लोट् (आत्मने.): मानयताम् · लङ् (आत्मने.): अमानयत · विधिलिङ् (आत्मने.): मानयेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): मानयिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अमीमनत · लृङ् (आत्मने.): अमानयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मानन · ण्वुल्: मानकः · तृच्: मानयिता · यत्: मान्यः · तव्य: मानयितव्यः · अनीयर्: माननीयः · क्त: मानितः · क्तवतु: मानितवान् · शानच्: मानयमानः · क्त्वा: मानयित्वा · ल्यप्: प्रमान्य · तुमुन्: मानयितुम् · णमुल्: मानम् · क्तिन्: मान्ति · क्वसु: मानयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मानयते | मान् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: मन् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | मन् धातु (दिवादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) |
मानयते ➤ गर्व करना, स्थिर करना, गर्वीला होना
संस्कृत: स्तम्भे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.६ सेकण्ड