॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ज्ञान प्राप्ति की इच्छा करना
संस्कृत: पूजायाम् जिज्ञासायां च
अंग्रेज़ी: to worship, to investigate,to examine,to wish to know
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मीमांसते | मीमांसेते | मीमांसन्ते |
| मध्यम | मीमांससे | मीमांसेथे | मीमांसध्वे |
| उत्तम | मीमांसे | मीमांसावहे | मीमांसामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): मीमांसते · लिट् (आत्मने.): मीमांसाञ्चक्रे · लुट् (आत्मने.): मीमांसिता · लृट् (आत्मने.): मीमांसिष्यते · लोट् (आत्मने.): मीमांसताम् · लङ् (आत्मने.): अमीमांसत · विधिलिङ् (आत्मने.): मीमांसेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): मीमांसिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अमीमांसिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अमीमांसिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मीमांसन · ण्वुल्: मीमांसकः · तृच्: मीमांसिता · यत्: मीमांस्यः · तव्य: मीमांसितव्यः · अनीयर्: मीमांसनीयः · क्त: मीमांसितः · क्तवतु: मीमांसितवान् · शानच्: मीमांसमानः · क्त्वा: मीमांसित्वा · ल्यप्: प्रमीमांस्य · तुमुन्: मीमांसितुम् · णमुल्: मीमांसम् · घञ्: मीमांसः · क्तिन्: मीमांस्ति · क्वसु: मीमांसाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मीमांसते | मान् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: मीमांसता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मान् + घञ् · तद्धित: मीमांस + तल् (भाववाचक) | मीमांसता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: मान् + घञ् · तद्धित: मीमांस + तल् (भाववाचक) |
मीमांसते ➤ ज्ञान प्राप्ति की इच्छा करना
संस्कृत: पूजायाम् जिज्ञासायां च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.६ सेकण्ड