॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पागल होना, बुद्धि भ्रष्ट होना
संस्कृत: वैचित्त्ये
अंग्रेज़ी: to lose senses,to faint, to be foolish, to err
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मुह्यति | मुह्यतः | मुह्यन्ति |
| मध्यम | मुह्यसि | मुह्यथः | मुह्यथ |
| उत्तम | मुह्यामि | मुह्यावः | मुह्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: मुह्यति · लिट्: मुमोह · लुट्: मोग्धा · लृट्: मोक्ष्यति · लोट्: मुह्यतात् · लङ्: अमुह्यत् · विधिलिङ्: मुह्येत् · आशीर्लिङ्: मुह्यात् · लुङ्: अमुहत् · लृङ्: अमोक्ष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मोहन · ण्वुल्: मोहकः · तृच्: मोहिता · ण्यत्: मोह्यः · तव्य: मोहितव्यः · अनीयर्: मोहनीयः · क्त: मुग्धः · क्तवतु: मुग्धवान् · शतृ: मुह्यन् · स्य-शतृ: मोहिष्यन् · क्त्वा: मुहित्वा · ल्यप्: प्रमुह्य · तुमुन्: मोहितुम् · णमुल्: मोहम् · घञ्: मोहः · क्तिन्: मुग्धि · क्वसु: मुमुह्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मुह्यति | मुह् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: मुह्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मुह् + शतृ | मुह्यत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मुह् + शतृ |
मुह्यति ➤ पागल होना, बुद्धि भ्रष्ट होना
संस्कृत: वैचित्त्ये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड