॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: चित्त विकल होना, भ्रान्त होना, घबड़ा जाना
संस्कृत: विमोहने
अंग्रेज़ी: to be confused, to be afraid
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | युप्यति | युप्यतः | युप्यन्ति |
| मध्यम | युप्यसि | युप्यथः | युप्यथ |
| उत्तम | युप्यामि | युप्यावः | युप्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: युप्यति · लिट्: युयोप · लुट्: योपिता · लृट्: योपिष्यति · लोट्: युप्यतात् · लङ्: अयुप्यत् · विधिलिङ्: युप्येत् · आशीर्लिङ्: युप्यात् · लुङ्: अयुपत् · लृङ्: अयोपिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: योपन · ण्वुल्: योपकः · तृच्: योपिता · ण्यत्: योप्यः · तव्य: योपितव्यः · अनीयर्: योपनीयः · क्त: युपितः · क्तवतु: युपितवान् · शतृ: युप्यन् · स्य-शतृ: योपिष्यन् · क्त्वा: युपित्वा · ल्यप्: प्रयुप्य · तुमुन्: योपितुम् · णमुल्: योपम् · घञ्: योपः · क्तिन्: युप्ति · क्वसु: युयुप्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| युप्यति | युप् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: युप्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: युप् + शतृ | युप्यत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: युप् + शतृ |
युप्यति ➤ चित्त विकल होना, भ्रान्त होना, घबड़ा जाना
संस्कृत: विमोहने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड