॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सुहवना, आनन्दप्रद, संतोषजनक, आदि
संस्कृत: लक्ष्मी · पर्याय: लक्ष्मी, पद्मालया, पद्मा, कमला, श्री
व्युत्पत्ति: रम् + अच् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रमा | रमे | रमाः |
| द्वितीया | रमाम् | रमे | रमाः |
| तृतीया | रमया | रमाभ्याम् | रमाभिः |
| चतुर्थी | रमायै | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| पञ्चमी | रमायाः | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| षष्ठी | रमायाः | रमयोः | रमाणाम् |
| सप्तमी | रमायाम् | रमयोः | रमासु |
| सम्बोधन | हे रमे | हे रमे | हे रमाः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| रमा | रमा (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन (व्युत्पत्ति: रम् + अच्) |
रमा ➤ सुहवना, आनन्दप्रद, संतोषजनक, आदि
संस्कृत: लक्ष्मी · पर्याय: लक्ष्मी, पद्मालया, पद्मा, कमला, श्री
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| रमा |
लक्ष्मी के और नाम (१.१.३२) — इन्दिरा, लोकमाता, मा, क्षीरोदतनया, भार्गवी, लोकजननी, क्षीरसागरकन्यका |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड