॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: मारना, हिंसा करना, दुःख देना
संस्कृत: हिंसायाम्
अंग्रेज़ी: to kill, to destroy, to cause pain
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रोजति / रोजयति | रोजतः / रोजयतः | रोजन्ति / रोजयन्ति |
| मध्यम | रोजयसि / रोजसि | रोजथः / रोजयथः | रोजथ / रोजयथ |
| उत्तम | रोजयामि / रोजामि | रोजयावः / रोजावः | रोजयामः / रोजामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: रोजति · लट् (आत्मने.): रोजयते · लिट्: रुरोज · लिट् (आत्मने.): रोजयाञ्चक्रे · लुट्: रोजयिता · लुट् (आत्मने.): रोजयिता · लृट्: रोजयिष्यति · लृट् (आत्मने.): रोजयिष्यते · लोट्: रोजतात् · लोट् (आत्मने.): रोजयताम् · लङ्: अरोजत् · लङ् (आत्मने.): अरोजयत · विधिलिङ्: रोजयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): रोजयेत · आशीर्लिङ्: रुज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): रोजयिषीष्ट · लुङ्: अरूरुजत् · लुङ् (आत्मने.): अरूरुजत · लृङ्: अरोजयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अरोजयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: रोजन · ण्वुल्: रोजकः · तृच्: रोजिता · यत्: रोज्यः · ण्यत्: रोज्यः · तव्य: रोजितव्यः · अनीयर्: रोजनीयः · क्त: रुजितः · क्तवतु: रुजितवान् · शतृ: रोजन् · स्य-शतृ: रोजिष्यन् · शानच्: रोजयमानः · क्त्वा: रुजित्वा · ल्यप्: प्ररुज्य · तुमुन्: रोजितुम् · णमुल्: रोजम् · घञ्: रोगः · क्तिन्: रुक्ति · क्वसु: रुरुज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| रोजति | रुज् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: रोजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: रुज् + शतृ | रोजत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: रुज् + शतृ |
रोजति ➤ मारना, हिंसा करना, दुःख देना
संस्कृत: हिंसायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड