॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बेल, फैलने वाला पौधा
संस्कृत: शाखा, प्रियङ्गुवृक्षः, कुन्दभेदः, स्पृक्का, ज्योतिष्मती · पर्याय: वल्ली, व्रतति
व्युत्पत्ति: लत+अच्+टाप्
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | लता | लते | लताः |
| द्वितीया | लताम् | लते | लताः |
| तृतीया | लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
| चतुर्थी | लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| पञ्चमी | लतायाः | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| षष्ठी | लतायाः | लतयोः | लतानाम् |
| सप्तमी | लतायाम् | लतयोः | लतासु |
| सम्बोधन | हे लते | हे लते | हे लताः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| लताः | लता (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, बहुवचन अन्य सम्भावना: लता (स्त्री.) — द्वितीया विभक्ति, बहुवचन | लता (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
लताः ➤ बेल, फैलने वाला पौधा
संस्कृत: शाखा, प्रियङ्गुवृक्षः, कुन्दभेदः, स्पृक्का, ज्योतिष्मती · पर्याय: वल्ली, व्रतति
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| लता |
बेल (२.४.९) — वल्ली, व्रतति शाखा (२.४.११) — शाखा |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड