🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:37:55 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

लभते

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

लभते

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

लभते

अर्थ: प्राप्त होना, मिलना

संस्कृत: प्राप्तौ

अंग्रेज़ी: to get,to obtain,to take,to have,to find

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. लभ् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — लभ् (भ्वादिगण) · अर्थ: प्राप्त होना, मिलना (प्राप्तौ)

लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलभतेलभेतेलभन्ते
मध्यमलभसेलभेथेलभध्वे
उत्तमलभेलभावहेलभामहे

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): लभते · लिट् (आत्मने.): लेभे · लुट् (आत्मने.): लब्धा · लृट् (आत्मने.): लप्स्यते · लोट् (आत्मने.): लभताम् · लङ् (आत्मने.): अलभत · विधिलिङ् (आत्मने.): लभेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): लप्सीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अलब्ध · लृङ् (आत्मने.): अलप्स्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: लम्भन · ण्वुल्: लम्भकः · तृच्: लब्धा · यत्: लभ्यः · तव्य: लब्धव्यः · अनीयर्: लम्भनीयः · क्त: लब्धः · क्तवतु: लब्धवान् · शानच्: लभमानः · क्त्वा: लब्ध्वा · ल्यप्: प्रलभ्य · तुमुन्: लब्धुम् · णमुल्: लम्भम् · घञ्: लाभः · क्तिन्: लब्धि · क्वसु: लेभिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
लभतेलभ् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

लभते ➤ प्राप्त होना, मिलना
संस्कृत: प्राप्तौ

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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