॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बढ़ना, अधिक होना
संस्कृत: वृद्धौ
अंग्रेज़ी: to increase, to grow, to prosper
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धते | वर्धेते | वर्धन्ते |
| मध्यम | वर्धसे | वर्धेथे | वर्धध्वे |
| उत्तम | वर्धे | वर्धावहे | वर्धामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): वर्धते · लिट् (आत्मने.): ववृधे · लुट् (आत्मने.): वर्धिता · लृट्: वर्त्स्यति · लृट् (आत्मने.): वर्धिष्यते · लोट् (आत्मने.): वर्धताम् · लङ् (आत्मने.): अवर्धत · विधिलिङ् (आत्मने.): वर्धेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): वर्धिषीष्ट · लुङ्: अवृधत् · लुङ् (आत्मने.): अवर्धिष्ट · लृङ्: अवर्त्स्यत् · लृङ् (आत्मने.): अवर्धिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: वर्धन · ण्वुल्: वर्धकः · तृच्: वर्धिता · तव्य: वर्धितव्यः · अनीयर्: वर्धनीयः · क्त: वृद्धः · क्तवतु: वृद्धवान् · स्य-शतृ: वर्त्स्यन् · शानच्: वर्धमानः · क्त्वा: वृद्ध्वा · ल्यप्: प्रवृध्य · तुमुन्: वर्धितुम् · णमुल्: वर्धम् · घञ्: वर्धः · क्तिन्: वृद्धि · क्वसु: ववृध्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| वर्धते | वृध् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: वर्धता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: वर्ध + तल् (भाववाचक) | वर्धत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वृध् + शतृ |
वर्धते ➤ बढ़ना, अधिक होना
संस्कृत: वृद्धौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड