॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पण्डित, ज्ञानी
संस्कृत: पण्डितः, ज्ञानी, विद्वान्, विदत् · पर्याय: भाव, विपश्चित्, दोषज्ञ, सत्, सुधी
अंग्रेज़ी: Scholar
व्युत्पत्ति: विद् + क्वसु (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | विद्वत् / विद्वद् | विद्वसौ | विद्वसः |
| द्वितीया | विद्वसम् | विद्वसौ | विद्वसः |
| तृतीया | विद्वसा | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भिः |
| चतुर्थी | विद्वसे | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| पञ्चमी | विद्वसः | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| षष्ठी | विद्वसः | विद्वसोः | विद्वसाम् |
| सप्तमी | विद्वसि | विद्वसोः | विद्वत्सु |
| सम्बोधन | हे विद्वत् / हे विद्वद् | हे विद्वसौ | हे विद्वसः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| विद्वान् | विद्वस् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
विद्वान् ➤ पण्डित, ज्ञानी
संस्कृत: पण्डितः, ज्ञानी, विद्वान्, विदत् · पर्याय: भाव, विपश्चित्, दोषज्ञ, सत्, सुधी
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
ⓘ समास के खण्ड कोश से पहचाने गए हैं; विग्रह-वाक्य व समास-प्रकार (तत्पुरुष/बहुव्रीहि आदि) अर्थ पर निर्भर करता है।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड