🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:23:15 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

वृङ्क्ते

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

वृङ्क्ते

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

वृङ्क्ते

अर्थ: हिन्दी अर्थ उपलब्ध नहीं

संस्कृत: वर्जने

अंग्रेज़ी: to avoid,to abandon, to leave

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. वृञ्ज् धातु (अदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. वृङ्क्ति (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: वृञ्ज् + क्तिन्

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — वृञ्ज् (अदादिगण) · अर्थ: (वर्जने)

लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमवृङ्क्तेवृञ्जातेवृञ्जते
मध्यमवृङ्क्षेवृञ्जाथेवृङ्ग्ध्वे
उत्तमवृञ्जेवृञ्ज्वहेवृञ्ज्महे

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): वृङ्क्ते · लिट् (आत्मने.): ववृञ्जे · लुट् (आत्मने.): वृञ्जिता · लृट् (आत्मने.): वृञ्जिष्यते · लोट् (आत्मने.): वृङ्क्ताम् · लङ् (आत्मने.): अवृङ्क्त · विधिलिङ् (आत्मने.): वृञ्जीत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): वृञ्जिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अवृञ्जिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अवृञ्जिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: वृञ्जन · ण्वुल्: वृञ्जकः · तृच्: वृञ्जिता · ण्यत्: वृञ्ज्यः · तव्य: वृञ्जितव्यः · अनीयर्: वृञ्जनीयः · क्त: वृञ्जितः · क्तवतु: वृञ्जितवान् · शानच्: वृञ्जानः · क्त्वा: वृञ्जित्वा · ल्यप्: प्रवृज्य · तुमुन्: वृञ्जितुम् · णमुल्: वृञ्जम् · घञ्: वृङ्गः · क्तिन्: वृङ्क्ति · क्वसु: ववृञ्ज्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
वृङ्क्तेवृञ्ज् धातु (अदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: वृङ्क्ति (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: वृञ्ज् + क्तिन्

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

वृङ्क्ते ➤ to avoid,to abandon, to leave (अंग्रेज़ी कोश)
संस्कृत: वर्जने

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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