॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: फैलना, व्याप्त होना
संस्कृत: व्याप्तौ
अंग्रेज़ी: to pervade,to spread
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वेवेष्टि | वेविष्टः | वेविषति |
| मध्यम | वेवेक्षि | वेविष्ठः | वेविष्ठ |
| उत्तम | वेवेष्मि | वेविष्वः | वेविष्मः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: वेवेष्टि · लट् (आत्मने.): वेविष्टे · लिट्: विवेष · लिट् (आत्मने.): विविषे · लुट्: वेष्टा · लुट् (आत्मने.): वेष्टा · लृट्: वेक्ष्यति · लृट् (आत्मने.): वेक्ष्यते · लोट्: वेविष्टात् · लोट् (आत्मने.): वेविष्टाम् · लङ्: अवेवेट् · लङ् (आत्मने.): अवेविष्ट · विधिलिङ्: वेविष्यात् · विधिलिङ् (आत्मने.): वेविषीत · आशीर्लिङ्: विष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): विक्षीष्ट · लुङ्: अविषत् · लुङ् (आत्मने.): अविक्षत · लृङ्: अवेक्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अवेक्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: वेषण · ण्वुल्: वेषकः · तृच्: वेष्टा · ण्यत्: वेष्यः · तव्य: वेष्टव्यः · अनीयर्: वेषणीयः · क्त: विष्टः · क्तवतु: विष्टवान् · शतृ: वेविषत्/वेविषद् · स्य-शतृ: वेक्ष्यन् · शानच्: वेविषाणः · क्त्वा: विष्ट्वा · ल्यप्: प्रविष्य · तुमुन्: वेष्टुम् · णमुल्: वेषम् · घञ्: वेषः · क्तिन्: विष्टि · क्वसु: विविष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| वेवेष्टि | विष् धातु (जुहोत्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
वेवेष्टि ➤ फैलना, व्याप्त होना
संस्कृत: व्याप्तौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.५ सेकण्ड