॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: डरना, क्षुब्ध होना, दुख भोगना
संस्कृत: भयसञ्चलनयोः
अंग्रेज़ी: to be vexed,to fear,to be angry, to be irritated
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | व्यथते | व्यथेते | व्यथन्ते |
| मध्यम | व्यथसे | व्यथेथे | व्यथध्वे |
| उत्तम | व्यथे | व्यथावहे | व्यथामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): व्यथते · लिट् (आत्मने.): विव्यथे · लुट् (आत्मने.): व्यथिता · लृट् (आत्मने.): व्यथिष्यते · लोट् (आत्मने.): व्यथताम् · लङ् (आत्मने.): अव्यथत · विधिलिङ् (आत्मने.): व्यथेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): व्यथिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अव्यथिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अव्यथिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: व्यथन · ण्वुल्: व्याथकः · तृच्: व्यथिता · ण्यत्: व्याथ्यः · तव्य: व्यथितव्यः · अनीयर्: व्यथनीयः · क्त: व्यथितः · क्तवतु: व्यथितवान् · शानच्: व्यथमानः · क्त्वा: व्यथित्वा · ल्यप्: प्रव्यथ्य · तुमुन्: व्यथितुम् · णमुल्: व्याथम् · घञ्: व्याथः · क्तिन्: व्यत्ति · क्वसु: विव्यथ्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| व्यथते | व्यथ् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: व्यथता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: व्यथ् + अच् · तद्धित: व्यथ + तल् (भाववाचक) | व्यथता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: व्यथ् + अच् · तद्धित: व्यथ + तल् (भाववाचक) |
व्यथते ➤ डरना, क्षुब्ध होना, दुख भोगना
संस्कृत: भयसञ्चलनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड