॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: क्षत करना, घाव करना, जख्मी करना
संस्कृत: गात्रविचूर्णने
अंग्रेज़ी: to attack, to hurt, to damage someone, to wound
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | व्रणयति | व्रणयतः | व्रणयन्ति |
| मध्यम | व्रणयसि | व्रणयथः | व्रणयथ |
| उत्तम | व्रणयामि | व्रणयावः | व्रणयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: व्रणयति · लट् (आत्मने.): व्रणयते · लिट्: व्रणयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): व्रणयाञ्चक्रे · लुट्: व्रणयिता · लुट् (आत्मने.): व्रणयिता · लृट्: व्रणयिष्यति · लृट् (आत्मने.): व्रणयिष्यते · लोट्: व्रणयतात् · लोट् (आत्मने.): व्रणयताम् · लङ्: अव्रणयत् · लङ् (आत्मने.): अव्रणयत · विधिलिङ्: व्रणयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): व्रणयेत · आशीर्लिङ्: व्रण्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): व्रणयिषीष्ट · लुङ्: अवव्रणत् · लुङ् (आत्मने.): अवव्रणत · लृङ्: अव्रणयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अव्रणयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: व्रणन · ण्वुल्: व्रणकः · तृच्: व्रणयिता · यत्: व्रण्यः · तव्य: व्रणयितव्यः · अनीयर्: व्रणनीयः · क्त: व्रणितः · क्तवतु: व्रणितवान् · शतृ: व्रणयन् · स्य-शतृ: व्रणयिष्यन् · शानच्: व्रणयमानः · क्त्वा: व्रणयित्वा · ल्यप्: प्रव्रणय्य · तुमुन्: व्रणयितुम् · णमुल्: व्रणम् · क्तिन्: व्रण्टि · क्वसु: व्रणयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| व्रणयति | व्रण धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: व्रण धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | व्रणयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: व्रण + शतृ |
व्रणयति ➤ क्षत करना, घाव करना, जख्मी करना
संस्कृत: गात्रविचूर्णने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड