॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दुर्भाषण करना, दुर्वचन कहना, मौन धारण करना, चुप रहना
संस्कृत: सम्यगवभाषणे
अंग्रेज़ी: to ill-speak, to abuse, to tell lies, to keep quiet
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शठयति | शठयतः | शठयन्ति |
| मध्यम | शठयसि | शठयथः | शठयथ |
| उत्तम | शठयामि | शठयावः | शठयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: शठयति · लट् (आत्मने.): शठयते · लिट्: शठयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): शठयाञ्चक्रे · लुट्: शठयिता · लुट् (आत्मने.): शठयिता · लृट्: शठयिष्यति · लृट् (आत्मने.): शठयिष्यते · लोट्: शठयतात् · लोट् (आत्मने.): शठयताम् · लङ्: अशठयत् · लङ् (आत्मने.): अशठयत · विधिलिङ्: शठयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): शठयेत · आशीर्लिङ्: शठ्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): शठयिषीष्ट · लुङ्: अशशठत् · लुङ् (आत्मने.): अशशठत · लृङ्: अशठयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अशठयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शठन · ण्वुल्: शठकः · तृच्: शठयिता · यत्: शठ्यः · तव्य: शठयितव्यः · अनीयर्: शठनीयः · क्त: शठितः · क्तवतु: शठितवान् · शतृ: शठयन् · स्य-शतृ: शठयिष्यन् · शानच्: शठयमानः · क्त्वा: शठयित्वा · ल्यप्: प्रशठय्य · तुमुन्: शठयितुम् · णमुल्: शठम् · क्तिन्: शट्टि · क्वसु: शठयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शठयति | शठ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: शठ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | शठयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: शठ + शतृ |
शठयति ➤ दुर्भाषण करना, दुर्वचन कहना, मौन धारण करना, चुप रहना
संस्कृत: सम्यगवभाषणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड