॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दान देना, जाना
संस्कृत: दाने गतौ च
अंग्रेज़ी: to go, to give
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शणति | शणतः | शणन्ति |
| मध्यम | शणसि | शणथः | शणथ |
| उत्तम | शणामि | शणावः | शणामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: शणति · लिट्: शशाण · लुट्: शणिता · लृट्: शणिष्यति · लोट्: शणतात् · लङ्: अशणत् · विधिलिङ्: शणेत् · आशीर्लिङ्: शण्यात् · लुङ्: अशणीत् · लृङ्: अशणिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शणन · ण्वुल्: शाणकः · तृच्: शणिता · ण्यत्: शाण्यः · तव्य: शणितव्यः · अनीयर्: शणनीयः · क्त: शणितः · क्तवतु: शणितवान् · शतृ: शणन् · स्य-शतृ: शणिष्यन् · क्त्वा: शणित्वा · ल्यप्: प्रशण्य · तुमुन्: शणितुम् · णमुल्: शाणम् · घञ्: शाणः · क्तिन्: शाण्टि · क्वसु: शेणिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शणति | शण् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: शणता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: शण + तल् (भाववाचक) | शणत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: शण् + शतृ |
शणति ➤ दान देना, जाना
संस्कृत: दाने गतौ च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड