॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रकाशित होना, शोभा पाना
संस्कृत: दीप्तौ
अंग्रेज़ी: to glow, to shine, to appear beautiful, to suite
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शोभते | शोभेते | शोभन्ते |
| मध्यम | शोभसे | शोभेथे | शोभध्वे |
| उत्तम | शोभे | शोभावहे | शोभामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): शोभते · लिट् (आत्मने.): शुशुभे · लुट् (आत्मने.): शोभिता · लृट् (आत्मने.): शोभिष्यते · लोट् (आत्मने.): शोभताम् · लङ् (आत्मने.): अशोभत · विधिलिङ् (आत्मने.): शोभेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): शोभिषीष्ट · लुङ्: अशुभत् · लुङ् (आत्मने.): अशोभिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अशोभिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शोभन · ण्वुल्: शोभकः · तृच्: शोभिता · ण्यत्: शोभ्यः · तव्य: शोभितव्यः · अनीयर्: शोभनीयः · क्त: शुभितः · क्तवतु: शुभितवान् · शानच्: शोभमानः · क्त्वा: शुभित्वा · ल्यप्: प्रशुभ्य · तुमुन्: शोभितुम् · णमुल्: शोभम् · घञ्: शोभः · क्तिन्: शुब्धि · क्वसु: शुशुभ्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शोभते | शुभ् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: शोभत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: शुभ् + शतृ | शोभत् (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: शुभ् + शतृ |
शोभते ➤ प्रकाशित होना, शोभा पाना
संस्कृत: दीप्तौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड