॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जाना
संस्कृत: गतौ
अंग्रेज़ी: to go,to move
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | श्रङ्कते | श्रङ्केते | श्रङ्कन्ते |
| मध्यम | श्रङ्कसे | श्रङ्केथे | श्रङ्कध्वे |
| उत्तम | श्रङ्के | श्रङ्कावहे | श्रङ्कामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): श्रङ्कते · लिट् (आत्मने.): शश्रङ्के · लुट् (आत्मने.): श्रङ्किता · लृट् (आत्मने.): श्रङ्किष्यते · लोट् (आत्मने.): श्रङ्कताम् · लङ् (आत्मने.): अश्रङ्कत · विधिलिङ् (आत्मने.): श्रङ्केत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): श्रङ्किषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अश्रङ्किष्ट · लृङ् (आत्मने.): अश्रङ्किष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: श्रङ्कण · ण्वुल्: श्रङ्ककः · तृच्: श्रङ्किता · ण्यत्: श्रङ्क्यः · तव्य: श्रङ्कितव्यः · अनीयर्: श्रङ्कणीयः · क्त: श्रङ्कितः · क्तवतु: श्रङ्कितवान् · शानच्: श्रङ्कमाणः · क्त्वा: श्रङ्कित्वा · ल्यप्: प्रश्रङ्क्य · तुमुन्: श्रङ्कितुम् · णमुल्: श्रङ्कम् · घञ्: श्रङ्कः · क्तिन्: श्रङ्क्ति · क्वसु: शश्रङ्क्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| श्रङ्कते | श्रङ्क् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: श्रङ्कता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्रङ्क् + घञ् · तद्धित: श्रङ्क + तल् (भाववाचक) | श्रङ्कता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: श्रङ्क् + घञ् · तद्धित: श्रङ्क + तल् (भाववाचक) |
श्रङ्कते ➤ जाना
संस्कृत: गतौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड