॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जलाना, दग्ध करना
संस्कृत: दाहे
अंग्रेज़ी: to set on fire
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | श्रेषति | श्रेषतः | श्रेषन्ति |
| मध्यम | श्रेषसि | श्रेषथः | श्रेषथ |
| उत्तम | श्रेषामि | श्रेषावः | श्रेषामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: श्रेषति · लिट्: शिश्रेष · लुट्: श्रेषिता · लृट्: श्रेषिष्यति · लोट्: श्रेषतात् · लङ्: अश्रेषत् · विधिलिङ्: श्रेषेत् · आशीर्लिङ्: श्रिष्यात् · लुङ्: अश्रेषीत् · लृङ्: अश्रेषिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: श्रेषण · ण्वुल्: श्रेषकः · तृच्: श्रेषिता · ण्यत्: श्रेष्यः · तव्य: श्रेषितव्यः · अनीयर्: श्रेषणीयः · क्त: श्रिष्टः · क्तवतु: श्रिष्टवान् · शतृ: श्रेषन् · स्य-शतृ: श्रेषिष्यन् · क्त्वा: श्रिष्ट्वा · ल्यप्: प्रश्रिष्य · तुमुन्: श्रेषितुम् · णमुल्: श्रेषम् · घञ्: श्रेषः · क्तिन्: श्रिष्टि · क्वसु: शिश्रिष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| श्रेषति | श्रिष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: श्रेषत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्रिष् + शतृ | श्रेषत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्रिष् + शतृ |
श्रेषति ➤ जलाना, दग्ध करना
संस्कृत: दाहे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड