॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: आलिंगन करना, गले लगाना, चिपके रहना
संस्कृत: आलिङ्गने
अंग्रेज़ी: to hug,to embrace
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | श्लिष्यति | श्लिष्यतः | श्लिष्यन्ति |
| मध्यम | श्लिष्यसि | श्लिष्यथः | श्लिष्यथ |
| उत्तम | श्लिष्यामि | श्लिष्यावः | श्लिष्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: श्लिष्यति · लिट्: शिश्लेष · लुट्: श्लेष्टा · लृट्: श्लेक्ष्यति · लोट्: श्लिष्यतात् · लङ्: अश्लिष्यत् · विधिलिङ्: श्लिष्येत् · आशीर्लिङ्: श्लिष्यात् · लुङ्: अश्लिक्षत् · लृङ्: अश्लेक्ष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: श्लेषण · ण्वुल्: श्लेषकः · तृच्: श्लेष्टा · ण्यत्: श्लेष्यः · तव्य: श्लेष्टव्यः · अनीयर्: श्लेषणीयः · क्त: श्लिष्टः · क्तवतु: श्लिष्टवान् · शतृ: श्लिष्यन् · स्य-शतृ: श्लेक्ष्यन् · क्त्वा: श्लिष्ट्वा · ल्यप्: प्रश्लिष्य · तुमुन्: श्लेष्टुम् · णमुल्: श्लेषम् · घञ्: श्लेषः · क्तिन्: श्लिष्टि · क्वसु: शिश्लिष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| श्लिष्यति | श्लिष् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: श्लिष्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्लिष् + शतृ | श्लिष्यत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्लिष् + शतृ |
श्लिष्यति ➤ आलिंगन करना, गले लगाना, चिपके रहना
संस्कृत: आलिङ्गने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड