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🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

श्लेषयति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

श्लेषयति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

श्लेषयति

अर्थ: मिलाप करना, आलिंगन करना, गले लगाना, सटे रहना, चिपके रहना

संस्कृत: श्लेषणे

अंग्रेज़ी: to hug,to embrace,to stay attached

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. श्लिष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. श्लिष् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  3. श्लिष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  4. श्लिष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  5. श्लेषयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्लिष् + शतृ
  6. श्लेषयत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्लिष् + शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — श्लिष् (चुरादिगण) · अर्थ: मिलाप करना, आलिंगन करना, गले लगाना, सटे रहना, चिपके रहना (श्लेषणे)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमश्लेषयतिश्लेषयतःश्लेषयन्ति
मध्यमश्लेषयसिश्लेषयथःश्लेषयथ
उत्तमश्लेषयामिश्लेषयावःश्लेषयामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: श्लेषयति · लट् (आत्मने.): श्लेषयते · लिट्: श्लेषयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): श्लेषयाञ्चक्रे · लुट्: श्लेषयिता · लुट् (आत्मने.): श्लेषयिता · लृट्: श्लेषयिष्यति · लृट् (आत्मने.): श्लेषयिष्यते · लोट्: श्लेषयतात् · लोट् (आत्मने.): श्लेषयताम् · लङ्: अश्लेषयत् · लङ् (आत्मने.): अश्लेषयत · विधिलिङ्: श्लेषयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): श्लेषयेत · आशीर्लिङ्: श्लेष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): श्लेषयिषीष्ट · लुङ्: अशिश्लिषत् · लुङ् (आत्मने.): अशिश्लिषत · लृङ्: अश्लेषयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अश्लेषयिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: श्लेषण · ण्वुल्: श्लेषकः · तृच्: श्लेषयिता · यत्: श्लेष्यः · तव्य: श्लेषयितव्यः · अनीयर्: श्लेषणीयः · क्त: श्लेषितः · क्तवतु: श्लेषितवान् · शतृ: श्लेषयन् · स्य-शतृ: श्लेषयिष्यन् · शानच्: श्लेषयमाणः · क्त्वा: श्लेषयित्वा · ल्यप्: प्रश्लेष्य · तुमुन्: श्लेषयितुम् · णमुल्: श्लेषम् · क्तिन्: श्लेष्टि · क्वसु: श्लेषयाम्बभूवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
श्लेषयतिश्लिष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: श्लिष् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | श्लिष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

श्लेषयति ➤ मिलाप करना, आलिंगन करना, गले लगाना, सटे रहना, चिपके रहना
संस्कृत: श्लेषणे

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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