॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रीती करना, स्नेह करना, सेवा करना, देखना
संस्कृत: प्रीतिदर्शनयोः प्रीतिसेवनयोः च
अंग्रेज़ी: to love, to show affection, to serve, to see
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | सभाजयति | सभाजयतः | सभाजयन्ति |
| मध्यम | सभाजयसि | सभाजयथः | सभाजयथ |
| उत्तम | सभाजयामि | सभाजयावः | सभाजयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: सभाजयति · लट् (आत्मने.): सभाजयते · लिट्: सभाजयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): सभाजयाञ्चक्रे · लुट्: सभाजयिता · लुट् (आत्मने.): सभाजयिता · लृट्: सभाजयिष्यति · लृट् (आत्मने.): सभाजयिष्यते · लोट्: सभाजयतात् · लोट् (आत्मने.): सभाजयताम् · लङ्: असभाजयत् · लङ् (आत्मने.): असभाजयत · विधिलिङ्: सभाजयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): सभाजयेत · आशीर्लिङ्: सभाज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): सभाजयिषीष्ट · लुङ्: अससभाजत् · लुङ् (आत्मने.): अससभाजत · लृङ्: असभाजयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): असभाजयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: सभाजन · ण्वुल्: सभाजकः · तृच्: सभाजयिता · यत्: सभाज्यः · तव्य: सभाजयितव्यः · अनीयर्: सभाजनीयः · क्त: सभाजितः · क्तवतु: सभाजितवान् · शतृ: सभाजयन् · स्य-शतृ: सभाजयिष्यन् · शानच्: सभाजयमानः · क्त्वा: सभाजयित्वा · ल्यप्: प्रसभाज्य · तुमुन्: सभाजयितुम् · णमुल्: सभाजम् · क्तिन्: सभाक्ति · क्वसु: सभाजयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| सभाजयति | सभाज धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: सभाज धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | सभाजयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सभाज + शतृ |
सभाजयति ➤ प्रीती करना, स्नेह करना, सेवा करना, देखना
संस्कृत: प्रीतिदर्शनयोः प्रीतिसेवनयोः च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड