॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: उत्तम, श्रेष्ठ, पूर्ण
संस्कृत: कुलीनः, मनोरमम्, रम्यम् · पर्याय: महाकुल, कुलीन, आर्य, सभ्य, सज्जन
व्युत्पत्ति: साध् + उन्, मध्य.अ.साधीयस्, उत्त.अ.साधिष्ठ (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | साधुः | साधू | साधवः |
| द्वितीया | साधुम् | साधू | साधून् |
| तृतीया | साधुना | साधुभ्याम् | साधुभिः |
| चतुर्थी | साधवे | साधुभ्याम् | साधुभ्यः |
| पञ्चमी | साधोः | साधुभ्याम् | साधुभ्यः |
| षष्ठी | साधोः | साध्वोः | साधूनाम् |
| सप्तमी | साधौ | साध्वोः | साधुषु |
| सम्बोधन | हे साधो | हे साधू | हे साधवः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| साधुः | साधु (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: अव्ययम् | साधु (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
साधुः ➤ उत्तम, श्रेष्ठ, पूर्ण
संस्कृत: कुलीनः, मनोरमम्, रम्यम् · पर्याय: महाकुल, कुलीन, आर्य, सभ्य, सज्जन
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| साधु |
कुलीन/श्रेष्ठ व्यक्ति (२.७.३) — महाकुल, कुलीन, आर्य, सभ्य, सज्जन, ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ सुन्दर (३.१.५२) — सुन्दर, रुचिर, चारु, सुषम, शोभन, कान्त, मनोरम, रुच्य |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड