🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 07:38:56 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

सुखयति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

सुखयति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

सुखयति

अर्थ: सुखी करना, आनंदानुभव करना

संस्कृत: तत्क्रियायाम्

अंग्रेज़ी: to make happy, to be happy

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. सुख धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. सुख धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  3. सुखयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सुख + शतृ
  4. सुखयत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सुख + शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — सुख (चुरादिगण) · अर्थ: सुखी करना, आनंदानुभव करना (तत्क्रियायाम्)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमसुखयतिसुखयतःसुखयन्ति
मध्यमसुखयसिसुखयथःसुखयथ
उत्तमसुखयामिसुखयावःसुखयामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: सुखयति · लट् (आत्मने.): सुखयते · लिट्: सुखयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): सुखयाञ्चक्रे · लुट्: सुखयिता · लुट् (आत्मने.): सुखयिता · लृट्: सुखयिष्यति · लृट् (आत्मने.): सुखयिष्यते · लोट्: सुखयतात् · लोट् (आत्मने.): सुखयताम् · लङ्: असुखयत् · लङ् (आत्मने.): असुखयत · विधिलिङ्: सुखयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): सुखयेत · आशीर्लिङ्: सुख्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): सुखयिषीष्ट · लुङ्: असुसुखत् · लुङ् (आत्मने.): असुसुखत · लृङ्: असुखयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): असुखयिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: सुखन · ण्वुल्: सुखकः · तृच्: सुखयिता · यत्: सुख्यः · तव्य: सुखयितव्यः · अनीयर्: सुखनीयः · क्त: सुखितः · क्तवतु: सुखितवान् · शतृ: सुखयन् · स्य-शतृ: सुखयिष्यन् · शानच्: सुखयमानः · क्त्वा: सुखयित्वा · ल्यप्: प्रसुखय्य · तुमुन्: सुखयितुम् · णमुल्: सुखम् · क्तिन्: सुक्ति · क्वसु: सुखयाम्बभूवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
सुखयतिसुख धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: सुख धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | सुखयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सुख + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

सुखयति ➤ सुखी करना, आनंदानुभव करना
संस्कृत: तत्क्रियायाम्

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें