॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ऐश्वर्यवान होना, प्रकाशित होना
संस्कृत: ऐश्वर्यदीप्त्योः
अंग्रेज़ी: to rule, to be powerful, to shine
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | सुरति | सुरतः | सुरन्ति |
| मध्यम | सुरसि | सुरथः | सुरथ |
| उत्तम | सुरामि | सुरावः | सुरामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: सुरति · लिट्: सुषोर · लुट्: सोरिता · लृट्: सोरिष्यति · लोट्: सुरतात् · लङ्: असुरत् · विधिलिङ्: सुरेत् · आशीर्लिङ्: सूर्यात् · लुङ्: असोरीत् · लृङ्: असोरिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: सोरण · ण्वुल्: सोरकः · तृच्: सोरिता · ण्यत्: सोर्यः · तव्य: सोरितव्यः · अनीयर्: सोरणीयः · क्त: सुरितः · क्तवतु: सुरितवान् · शतृ: सुरन् · स्य-शतृ: सोरिष्यन् · क्त्वा: सुरित्वा · ल्यप्: प्रसूर्य · तुमुन्: सोरितुम् · णमुल्: सोरम् · घञ्: सोरः · क्तिन्: सूर्ति · क्वसु: सुषूर्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| सुरति | सुर् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: सुरत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सुर् + शतृ | सुरत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सुर् + शतृ |
सुरति ➤ ऐश्वर्यवान होना, प्रकाशित होना
संस्कृत: ऐश्वर्यदीप्त्योः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड