॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ईर्ष्या करना, द्वेष करना
संस्कृत: ईर्ष्यायाम्
अंग्रेज़ी: to envy, to grudge
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | सूक्ष्यति | सूक्ष्यतः | सूक्ष्यन्ति |
| मध्यम | सूक्ष्यसि | सूक्ष्यथः | सूक्ष्यथ |
| उत्तम | सूक्ष्यामि | सूक्ष्यावः | सूक्ष्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: सूक्ष्यति · लिट्: सुषूक्ष्य · लुट्: सूक्ष्यिता · लृट्: सूक्ष्यिष्यति · लोट्: सूक्ष्यतात् · लङ्: असूक्ष्यत् · विधिलिङ्: सूक्ष्येत् · आशीर्लिङ्: सूक्ष्यात् · लुङ्: असूक्ष्यीत् · लृङ्: असूक्ष्यिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: सूक्ष्यण · ण्वुल्: सूक्ष्यकः · तृच्: सूक्ष्यिता · ण्यत्: सूक्ष्यः · तव्य: सूक्ष्यितव्यः · अनीयर्: सूक्ष्यणीयः · क्त: सूक्ष्यितः · क्तवतु: सूक्ष्यितवान् · शतृ: सूक्ष्यन् · स्य-शतृ: सूक्ष्यिष्यन् · क्त्वा: सूक्ष्यित्वा · ल्यप्: प्रसूक्ष्य · तुमुन्: सूक्ष्यितुम् · णमुल्: सूक्ष्यम् · घञ्: सूक्ष्यः · क्तिन्: सूष्टि · क्वसु: सुषूक्ष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| सूक्ष्यति | सूर्क्ष्य् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: सूक्ष्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सूर्क्ष्य् + शतृ | सूक्ष्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: सूर्क्ष्य् + ण्यत् · तद्धित: सूक्ष्य + तल् (भाववाचक) |
सूक्ष्यति ➤ ईर्ष्या करना, द्वेष करना
संस्कृत: ईर्ष्यायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड