॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: छोड़ना, विविध प्रकार से उत्पन्न करना, रचना करना
संस्कृत: विसर्गे
अंग्रेज़ी: to discharge, to let loose, to let off
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | सृज्यते | सृज्येते | सृज्यन्ते |
| मध्यम | सृज्यसे | सृज्येथे | सृज्यध्वे |
| उत्तम | सृज्ये | सृज्यावहे | सृज्यामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): सृज्यते · लिट् (आत्मने.): ससृजे · लुट् (आत्मने.): स्रष्टा · लृट् (आत्मने.): स्रक्ष्यते · लोट् (आत्मने.): सृज्यताम् · लङ् (आत्मने.): असृज्यत · विधिलिङ् (आत्मने.): सृज्येत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): सृक्षीष्ट · लुङ् (आत्मने.): असृष्ट · लृङ् (आत्मने.): अस्रक्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: सर्जन · ण्वुल्: सर्जकः · तृच्: स्रष्टा · तव्य: स्रष्टव्यः · अनीयर्: सर्जनीयः · क्त: सृष्टः · क्तवतु: सृष्टवान् · शानच्: सृज्यमानः · क्त्वा: सृष्ट्वा · ल्यप्: प्रसृज्य · तुमुन्: स्रष्टुम् · णमुल्: सर्जम् · घञ्: सर्गः · क्तिन्: सृष्टि · क्वसु: ससृज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| सृज्यते | सृज् धातु (दिवादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: सृज् धातु (दिवादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे | सृज् धातु (तुदादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे |
सृज्यते ➤ छोड़ना, विविध प्रकार से उत्पन्न करना, रचना करना
संस्कृत: विसर्गे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड